«Όσο μπορείς» του Κωνσταντίνου Καβάφη – “उतना जितना तुम कर सको” कोंस्तांतिन कवाफ़ी की एक कविता

Κωνσταντίνος Καβάφης «Όσο μπορείς»

Κι αν δεν μπορείς να κάμεις την ζωή σου όπως την θέλεις,
τούτο προσπάθησε τουλάχιστον
όσο μπορείς: μην την εξευτελίζεις
μες στην πολλή συνάφεια του κόσμου,
μες στες πολλές κινήσεις κι ομιλίες.

Μην την εξευτελίζεις πηγαίνοντάς την,
γυρίζοντας συχνά κ’ εκθέτοντάς την
στων σχέσεων και των συναναστροφών
την καθημερινήν ανοησία,
ώς που να γίνει σα μια ξένη φορτική.


कोंस्तांतिन कवाफ़ी “उतना जितना तुम कर सको”

कोंस्तांतिन कवाफ़ी “उतना जितना तुम कर सको”
अनुवाद :  दिमित्रियोस वासिलियादिस एवं डॉ मंगला रानी 

और अगर अपनी ज़िन्दगी को वैसा नहीं बना सकते , जैसा तुम उसे चाहते हो,
तो कम से कम यह कोशिश करो
उतना जितना तुम कर सको: उसे छोटा ना बनाओ,
दुनिया के साथ बहुत अधिक संपर्क से,
बहुत ज़्यादा गतिमयता और वाचनों से।

उसे अमर्यादित न करना
लगातार उसे तोड़-मोड़ और उजागर करके
रिश्तों और सामाजिकता की निरंतर बेवकूफी में,
जब तक वह एक बेगाना बोझ की तरह हो जाती।।


Constantine Cavafy “As much as you can”
Translated by Dimitrios Vassiliadis

And if you can not shape your life the way you want,
this try at least
as much as you can: do not disgrace it
by too much contact with the world,
by too many movements and speeches.

Do not disgrace it by dragging it along,
often turning and exposing it
to the daily silliness of relationships and socializing
until it becomes like a foreign burdensome.


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