अनंत काल – कोंस्तांतिन कवाफ़ी की एक कविता

अनुवाद :  दिमित्रियोस वासिलियादिस

Από τα κρυμμένα ποιήματα του Καβάφη (1895)
कवाफ़ी की छुपी हुई कविताओं से (1895)

Ο Ινδός Αρσούνας, βασιλεύς φιλάνθρωπος και πράος,
भारतीय अरसौं, एक परोपकारी और नम्र राजा,
μισούσε ταις σφαγαίς. Ποτέ δεν έκαμνε πολέμους.
वह नरसंहार से नफरत करता था।

Πλην του πολέμου ο φοβερός θεός δυσηρεστήθη
लेकिन युद्ध के भयानक देव दुखी हो गए —
(λιγόστεψεν η δόξα του άδειασαν οι ναοί του) –
(उनकी महिमा कम हो गई, उनके मंदिर खाली हो गए) –
και μπήκε με θυμό πολύ στου Αρσούνα το παλάτι.
और बड़े क्रोध के साथ अर्जुन के महल में प्रवेश किया।

Ο βασιλεύς φοβήθηκε και λέει «Θεέ μεγάλε
राजा घबरा गया और बोला: “महान ईश्वर
συγχώρεσέ με αν δεν μπορώ ζωή να πάρω ανθρώπου».
अगर मैं मानव जीवन नहीं ले सकता, तो मुझे माफ कर देना”।

Με περιφρόνησι ο θεός απήντησε «Από μένα
अवमानना के साथ, भगवान ने जवाब दिया: “मुझ से
νομίζεσαι πιο δίκαιος; Με λέξεις μη γελιέσαι.
क्या आपको लगता है किआप निष्पक्ष हैं? शब्दों से भ्रम में मत रहो।
Καμμιά ζωή δεν παίρνεται. Γνώριζε πως ποτέ του
कोई जीवन नहीं लिया जाता है। जान लें कि कभी भी
μήτε γεννήθηκε κανείς, μήτε κανείς πεθαίνει».
किसी का जन्म नहीं होता, न ही किसी की मृत्यु होती है।”

Κωνσταντίνος Π. Καβάφης
कोंस्तांतिन प. कवाफ़ी


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